रोहिणी नक्षत्र (Rohini)

27 में से 4वाँ नक्षत्र · निरयन 40°00′–53°20′

राशि
वृषभ
दशा-स्वामी
चंद्र — विंशोत्तरी में 10 वर्ष
देवता
प्रजापति
प्रतीक
बैलगाड़ी
गण
मनुष्य
विस्तार
13°20′ (चार पद, हर पद 3°20′)

चार पद

पदराशि में अंशनवांश राशि
पद 1वृषभ 10°00′ – 13°20′मेष
पद 2वृषभ 13°20′ – 16°40′वृषभ
पद 3वृषभ 16°40′ – 20°00′मिथुन
पद 4वृषभ 20°00′ – 23°20′कर्क

पद की गणना: नक्षत्र में बीते अंश ÷ 3°20′। हर पद एक नवांश के बराबर है। सीमा के पास जन्म हो तो मिनट-सेकंड तक सटीक जन्म-समय ज़रूरी है।

दशा से संबंध

जन्म के समय चंद्रमा रोहिणी में हो तो विंशोत्तरी दशा चंद्र की महादशा से शुरू होती है। नक्षत्र का जितना भाग चंद्र पार कर चुका हो, उतना भाग इस 10 वर्ष की महादशा में से पहले ही बीता माना जाता है — बाकी ‘जन्म के समय शेष दशा’ है। दशा समय-पठन का साधन है, किसी घटना की गारंटी नहीं।

देवता और प्रतीक सांस्कृतिक स्मृति हैं, वैज्ञानिक कारण नहीं — इन्हें व्यक्ति के बारे में निश्चित निर्णय की तरह न पढ़ें।

पुस्तक में कहाँ पढ़ें

पृष्ठ-संख्या ‘व्यावहारिक कुंडली विज्ञान’ (अष्टम संस्करण, 166 पृष्ठ) की है।

यह पुस्तक शैक्षिक अध्ययन-सामग्री है। इसमें दी गई ज्योतिषीय व्याख्याएँ पारंपरिक और सांस्कृतिक अध्ययन के लिए हैं; वे निश्चित भविष्यवाणी, चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं हैं।