पंचांग 27 अक्टूबर 1983
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 अक्टूबर 1983 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय22:44
चंद्रास्त11:28
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1905 · विक्रम (चैत्रादि) 2040
- संवत्सर:
- रुधिरोद्गारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 23:48 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 22:05 (28 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 20:06 तक, फिर पुनर्वसु 19:07 (28 अक्टू॰) तक
- योग
- शिव 14:44 तक, फिर सिद्ध 12:17 (28 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 12:33 तक, फिर वणिज 23:48 तक, फिर विष्टि 10:58 (28 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल13:44 – 15:11
- यमगंड06:31 – 07:58
- गुलिक काल09:25 – 10:51
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:31 – 07:58
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:25
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:51
- चर(सामान्य)10:51 – 12:18
- लाभ(शुभ)12:18 – 13:44
- अमृत(शुभ)13:44 – 15:11
- काल(वर्जित (परंपरा))15:11 – 16:38
- शुभ(शुभ)16:38 – 18:04
रात
- अमृत(शुभ)18:04 – 19:38
- चर(सामान्य)19:38 – 21:11
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:45
- काल(वर्जित (परंपरा))22:45 – 00:18 (28 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)00:18 (28 अक्टू॰) – 01:52 (28 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:52 (28 अक्टू॰) – 03:25 (28 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)03:25 (28 अक्टू॰) – 04:58 (28 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)04:58 (28 अक्टू॰) – 06:32 (28 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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