पंचांग 25 फ़रवरी 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 फ़रवरी 1984 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:57
सूर्यास्त18:38
चंद्रोदय02:59 (26 फ़र॰)
चंद्रास्त13:18
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1905 · विक्रम (चैत्रादि) 2040
संवत्सर:
रुधिरोद्गारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
वृश्चिक 11:03 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण नवमी 11:24 तक, फिर कृष्ण दशमी 12:42 (26 फ़र॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 11:03 तक, फिर मूल 12:53 (26 फ़र॰) तक
योग
वज्र 01:01 (26 फ़र॰) तक, फिर सिद्धि 01:07 (27 फ़र॰) तक
करण
गर 11:24 तक, फिर वणिज 23:59 तक, फिर विष्टि 12:42 (26 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:11
  • राहु काल09:52 – 11:20
  • यमगंड14:15 – 15:43
  • गुलिक काल06:57 – 08:24

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:57 – 08:24
  • शुभ(शुभ)08:24 – 09:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:52 – 11:20
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:20 – 12:47
  • चर(सामान्य)12:47 – 14:15
  • लाभ(शुभ)14:15 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:11 – 18:38

रात

  • लाभ(शुभ)18:38 – 20:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:11 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:15
  • अमृत(शुभ)23:15 – 00:47 (26 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)00:47 (26 फ़र॰) – 02:19 (26 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:19 (26 फ़र॰) – 03:52 (26 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:52 (26 फ़र॰) – 05:24 (26 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)05:24 (26 फ़र॰) – 06:56 (26 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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