पंचांग 13 मार्च 1984
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 मार्च 1984 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:44
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय14:31
चंद्रास्त04:11 (14 मार्च)
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1905 · विक्रम (चैत्रादि) 2040
- संवत्सर:
- रुधिरोद्गारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मिथुन 10:12 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 08:42 तक, फिर शुक्ल एकादशी 06:07 (14 मार्च) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 02:58 (15 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 15:48 तक, फिर पुष्य 13:45 (14 मार्च) तक
- योग
- शोभन 21:55 तक, फिर अतिगण्ड 18:20 (14 मार्च) तक
- करण
- गर 08:42 तक, फिर वणिज 19:30 तक, फिर विष्टि 06:07 (14 मार्च) तक, फिर बव 16:37 (14 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:08
- राहु काल15:44 – 17:13
- यमगंड09:44 – 11:14
- गुलिक काल12:44 – 14:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:44 – 08:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:14 – 09:44
- चर(सामान्य)09:44 – 11:14
- लाभ(शुभ)11:14 – 12:44
- अमृत(शुभ)12:44 – 14:14
- काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:44
- शुभ(शुभ)15:44 – 17:13
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:13 – 18:43
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:43 – 20:13
- लाभ(शुभ)20:13 – 21:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:13
- शुभ(शुभ)23:13 – 00:43 (14 मार्च)
- अमृत(शुभ)00:43 (14 मार्च) – 02:13 (14 मार्च)
- चर(सामान्य)02:13 (14 मार्च) – 03:43 (14 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:43 (14 मार्च) – 05:13 (14 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:13 (14 मार्च) – 06:43 (14 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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