पंचांग 10 अप्रैल 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अप्रैल 1984 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय13:22
चंद्रास्त02:55 (11 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल नवमी 19:39 तक, फिर शुक्ल दशमी 17:09 (11 अप्रैल) तक
नक्षत्र
पुष्य 22:02 तक, फिर आश्लेषा 20:14 (11 अप्रैल) तक
योग
धृति 02:11 (11 अप्रैल) तक, फिर शूल 22:55 (11 अप्रैल) तक
करण
बालव 08:42 तक, फिर कौलव 19:39 तक, फिर तैतिल 06:28 (11 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:00
  • राहु काल15:43 – 17:16
  • यमगंड09:28 – 11:02
  • गुलिक काल12:36 – 14:09

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:28
  • चर(सामान्य)09:28 – 11:02
  • लाभ(शुभ)11:02 – 12:36
  • अमृत(शुभ)12:36 – 14:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:16
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:50

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
  • लाभ(शुभ)20:16 – 21:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:09
  • शुभ(शुभ)23:09 – 00:35 (11 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)00:35 (11 अप्रैल) – 02:01 (11 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)02:01 (11 अप्रैल) – 03:28 (11 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:28 (11 अप्रैल) – 04:54 (11 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (11 अप्रैल) – 06:20 (11 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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