पंचांग 8 जून 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 जून 1984 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:09
चंद्रोदय14:10
चंद्रास्त02:29 (9 जून)
मास:
ज्येष्ठ (अमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल नवमी 06:42 तक, फिर शुक्ल दशमी 04:26 (9 जून) तक, फिर शुक्ल एकादशी 02:17 (10 जून) तक
नक्षत्र
हस्त 02:11 (9 जून) तक, फिर चित्रा 00:49 (10 जून) तक
योग
व्यतीपात 00:13 (9 जून) तक, फिर वरीयान 21:24 (9 जून) तक
करण
कौलव 06:42 तक, फिर तैतिल 17:34 तक, फिर गर 04:26 (9 जून) तक, फिर वणिज 15:21 (9 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 13:00
  • राहु काल10:54 – 12:33
  • यमगंड15:51 – 17:30
  • गुलिक काल07:36 – 09:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)05:57 – 07:36
  • लाभ(शुभ)07:36 – 09:15
  • अमृत(शुभ)09:15 – 10:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:33
  • शुभ(शुभ)12:33 – 14:12
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:51 – 17:30
  • चर(सामान्य)17:30 – 19:09

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:09 – 20:30
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:30 – 21:51
  • लाभ(शुभ)21:51 – 23:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:33 (9 जून)
  • शुभ(शुभ)00:33 (9 जून) – 01:54 (9 जून)
  • अमृत(शुभ)01:54 (9 जून) – 03:15 (9 जून)
  • चर(सामान्य)03:15 (9 जून) – 04:36 (9 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:36 (9 जून) – 05:57 (9 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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