पंचांग 27 जून 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 जून 1984 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:00
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय04:58 (28 जून)
चंद्रास्त17:40
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 11:08 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 10:16 (28 जून) तक
नक्षत्र
रोहिणी 20:33 तक, फिर मृगशीर्ष 20:10 (28 जून) तक
योग
शूल 10:45 तक, फिर गण्ड 09:03 (28 जून) तक
करण
वणिज 11:08 तक, फिर विष्टि 22:47 तक, फिर शकुनि 10:16 (28 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:37 – 14:16
  • यमगंड07:39 – 09:18
  • गुलिक काल10:58 – 12:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:00 – 07:39
  • अमृत(शुभ)07:39 – 09:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:18 – 10:58
  • शुभ(शुभ)10:58 – 12:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:56
  • चर(सामान्य)15:56 – 17:35
  • लाभ(शुभ)17:35 – 19:14

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:35
  • शुभ(शुभ)20:35 – 21:56
  • अमृत(शुभ)21:56 – 23:16
  • चर(सामान्य)23:16 – 00:37 (28 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (28 जून) – 01:58 (28 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (28 जून) – 03:19 (28 जून)
  • लाभ(शुभ)03:19 (28 जून) – 04:39 (28 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:39 (28 जून) – 06:00 (28 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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