पंचांग 30 जून 1984
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 जून 1984 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय06:56
चंद्रास्त20:40
- मास:
- आषाढ़ (अमांत)
- संवत:
- शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
- संवत्सर:
- रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मिथुन 12:16 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 06:51 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 04:32 (1 जुल॰) तक, फिर शुक्ल तृतीया 01:58 (2 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 17:54 तक, फिर पुष्य 16:14 (1 जुल॰) तक
- योग
- व्याघात 01:24 (1 जुल॰) तक, फिर हर्षण 22:17 (1 जुल॰) तक
- करण
- बव 06:51 तक, फिर बालव 17:44 तक, फिर कौलव 04:32 (1 जुल॰) तक, फिर तैतिल 15:16 (1 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04
- राहु काल09:19 – 10:58
- यमगंड14:17 – 15:56
- गुलिक काल06:01 – 07:40
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:01 – 07:40
- शुभ(शुभ)07:40 – 09:19
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:19 – 10:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:38
- चर(सामान्य)12:38 – 14:17
- लाभ(शुभ)14:17 – 15:56
- अमृत(शुभ)15:56 – 17:35
- काल(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:14
रात
- लाभ(शुभ)19:14 – 20:35
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:35 – 21:56
- शुभ(शुभ)21:56 – 23:17
- अमृत(शुभ)23:17 – 00:38 (1 जुल॰)
- चर(सामान्य)00:38 (1 जुल॰) – 01:59 (1 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:59 (1 जुल॰) – 03:19 (1 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:19 (1 जुल॰) – 04:40 (1 जुल॰)
- लाभ(शुभ)04:40 (1 जुल॰) – 06:01 (1 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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