पंचांग 8 सितंबर 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 सितंबर 1984 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय17:49
चंद्रास्त05:24 (9 सित॰)
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मकर 12:13 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 08:14 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 10:16 (9 सित॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 01:30 (9 सित॰) तक, फिर शतभिषा 04:15 (10 सित॰) तक
योग
अतिगण्ड 08:16 तक, फिर सुकर्मा 08:52 (9 सित॰) तक
करण
तैतिल 08:14 तक, फिर गर 21:13 तक, फिर वणिज 10:16 (9 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:56
  • राहु काल09:26 – 10:59
  • यमगंड14:04 – 15:37
  • गुलिक काल06:21 – 07:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:53
  • शुभ(शुभ)07:53 – 09:26
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:59
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:32
  • चर(सामान्य)12:32 – 14:04
  • लाभ(शुभ)14:04 – 15:37
  • अमृत(शुभ)15:37 – 17:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:10 – 18:43

रात

  • लाभ(शुभ)18:43 – 20:10
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:10 – 21:37
  • शुभ(शुभ)21:37 – 23:04
  • अमृत(शुभ)23:04 – 00:32 (9 सित॰)
  • चर(सामान्य)00:32 (9 सित॰) – 01:59 (9 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:59 (9 सित॰) – 03:26 (9 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:26 (9 सित॰) – 04:53 (9 सित॰)
  • लाभ(शुभ)04:53 (9 सित॰) – 06:21 (9 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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