पंचांग 25 सितंबर 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 सितंबर 1984 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:28
चंद्रोदय06:24
चंद्रास्त18:54
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 08:40 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 04:49 (26 सित॰) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 01:10 (27 सित॰) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 10:53 तक, फिर हस्त 07:50 (26 सित॰) तक
योग
शुक्ल 12:49 तक, फिर ब्रह्म 08:32 (26 सित॰) तक
करण
नाग 08:40 तक, फिर किंस्तुघ्न 18:44 तक, फिर बव 04:49 (26 सित॰) तक, फिर बालव 14:57 (26 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:50
  • राहु काल15:27 – 16:57
  • यमगंड09:24 – 10:55
  • गुलिक काल12:26 – 13:56

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:55
  • लाभ(शुभ)10:55 – 12:26
  • अमृत(शुभ)12:26 – 13:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:56 – 15:27
  • शुभ(शुभ)15:27 – 16:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:57 – 18:28

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:28 – 19:57
  • लाभ(शुभ)19:57 – 21:27
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:27 – 22:56
  • शुभ(शुभ)22:56 – 00:26 (26 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:26 (26 सित॰) – 01:55 (26 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:55 (26 सित॰) – 03:25 (26 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 सित॰) – 04:54 (26 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (26 सित॰) – 06:24 (26 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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