पंचांग 2 अक्टूबर 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 अक्टूबर 1984 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:22
चंद्रोदय13:32
चंद्रास्त00:39 (3 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 15:34 तक, फिर शुक्ल नवमी 16:28 (3 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 00:54 (3 अक्टू॰) तक, फिर उत्तराषाढ़ा 02:37 (4 अक्टू॰) तक
योग
शोभन 14:07 तक, फिर अतिगण्ड 13:43 (3 अक्टू॰) तक
करण
बव 15:34 तक, फिर बालव 03:56 (3 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 16:28 (3 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47
  • राहु काल15:23 – 16:52
  • यमगंड09:24 – 10:54
  • गुलिक काल12:23 – 13:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:54
  • लाभ(शुभ)10:54 – 12:23
  • अमृत(शुभ)12:23 – 13:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:23
  • शुभ(शुभ)15:23 – 16:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:52 – 18:22

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:22 – 19:52
  • लाभ(शुभ)19:52 – 21:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:23 – 22:53
  • शुभ(शुभ)22:53 – 00:23 (3 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:23 (3 अक्टू॰) – 01:54 (3 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:54 (3 अक्टू॰) – 03:24 (3 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (3 अक्टू॰) – 04:55 (3 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:55 (3 अक्टू॰) – 06:25 (3 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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