पंचांग 11 नवंबर 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 नवंबर 1984 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:39
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय19:59
चंद्रास्त08:46
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृषभ 23:02 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 02:53 (12 नव॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 03:12 (13 नव॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 10:23 तक, फिर मृगशीर्ष 11:35 (12 नव॰) तक
योग
शिव 00:26 (12 नव॰) तक, फिर सिद्ध 23:35 (12 नव॰) तक
करण
वणिज 14:32 तक, फिर विष्टि 02:53 (12 नव॰) तक, फिर बव 15:06 (12 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल16:33 – 17:57
  • यमगंड12:18 – 13:43
  • गुलिक काल15:08 – 16:33

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:39 – 08:03
  • चर(सामान्य)08:03 – 09:28
  • लाभ(शुभ)09:28 – 10:53
  • अमृत(शुभ)10:53 – 12:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:43
  • शुभ(शुभ)13:43 – 15:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:33 – 17:57

रात

  • शुभ(शुभ)17:57 – 19:33
  • अमृत(शुभ)19:33 – 21:08
  • चर(सामान्य)21:08 – 22:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:18 (12 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:18 (12 नव॰) – 01:53 (12 नव॰)
  • लाभ(शुभ)01:53 (12 नव॰) – 03:29 (12 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:29 (12 नव॰) – 05:04 (12 नव॰)
  • शुभ(शुभ)05:04 (12 नव॰) – 06:39 (12 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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