पंचांग 21 फ़रवरी 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 फ़रवरी 1985 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय08:04
चंद्रास्त20:02
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
कुंभ 20:31 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 03:41 (22 फ़र॰) तक, फिर शुक्ल तृतीया 06:01 (23 फ़र॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाभाद्रपदा 03:10 (22 फ़र॰) तक, फिर उत्तराभाद्रपदा 05:57 (23 फ़र॰) तक
योग
सिद्ध 21:49 तक, फिर साध्य 22:28 (22 फ़र॰) तक
करण
बालव 14:39 तक, फिर कौलव 03:41 (22 फ़र॰) तक, फिर तैतिल 16:48 (22 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल14:15 – 15:42
  • यमगंड06:59 – 08:26
  • गुलिक काल09:53 – 11:21

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:59 – 08:26
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:26 – 09:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:53 – 11:21
  • चर(सामान्य)11:21 – 12:48
  • लाभ(शुभ)12:48 – 14:15
  • अमृत(शुभ)14:15 – 15:42
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:10
  • शुभ(शुभ)17:10 – 18:37

रात

  • अमृत(शुभ)18:37 – 20:10
  • चर(सामान्य)20:10 – 21:42
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (22 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)00:48 (22 फ़र॰) – 02:20 (22 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:20 (22 फ़र॰) – 03:53 (22 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)03:53 (22 फ़र॰) – 05:25 (22 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)05:25 (22 फ़र॰) – 06:58 (22 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें