पंचांग 5 मार्च 1985
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
5 मार्च 1985 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:50
सूर्यास्त18:41
चंद्रोदय17:03
चंद्रास्त06:19 (6 मार्च)
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
- संवत्सर:
- रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- कर्क 18:49 तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 13:59 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 11:02 (6 मार्च) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 18:49 तक, फिर मघा 16:30 (6 मार्च) तक
- योग
- अतिगण्ड 16:51 तक, फिर सुकर्मा 13:13 (6 मार्च) तक
- करण
- तैतिल 13:59 तक, फिर गर 00:34 (6 मार्च) तक, फिर वणिज 11:02 (6 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:09
- राहु काल15:43 – 17:12
- यमगंड09:48 – 11:17
- गुलिक काल12:46 – 14:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:50 – 08:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:19 – 09:48
- चर(सामान्य)09:48 – 11:17
- लाभ(शुभ)11:17 – 12:46
- अमृत(शुभ)12:46 – 14:15
- काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
- शुभ(शुभ)15:43 – 17:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:12 – 18:41
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:41 – 20:12
- लाभ(शुभ)20:12 – 21:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:14
- शुभ(शुभ)23:14 – 00:45 (6 मार्च)
- अमृत(शुभ)00:45 (6 मार्च) – 02:16 (6 मार्च)
- चर(सामान्य)02:16 (6 मार्च) – 03:48 (6 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:48 (6 मार्च) – 05:19 (6 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:19 (6 मार्च) – 06:50 (6 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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