पंचांग 20 अप्रैल 1985
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 अप्रैल 1985 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:14
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय06:16
चंद्रास्त19:04
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
- संवत्सर:
- क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 10:52 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 13:27 (21 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 00:54 (21 अप्रैल) तक, फिर भरणी 03:57 (22 अप्रैल) तक
- योग
- विष्कम्भ 11:45 तक, फिर प्रीति 12:47 (21 अप्रैल) तक
- करण
- नाग 10:52 तक, फिर किंस्तुघ्न 00:10 (21 अप्रैल) तक, फिर बव 13:27 (21 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58
- राहु काल09:24 – 10:58
- यमगंड14:08 – 15:43
- गुलिक काल06:14 – 07:49
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:14 – 07:49
- शुभ(शुभ)07:49 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:33
- चर(सामान्य)12:33 – 14:08
- लाभ(शुभ)14:08 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:18
- काल(वर्जित (परंपरा))17:18 – 18:52
रात
- लाभ(शुभ)18:52 – 20:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:43
- शुभ(शुभ)21:43 – 23:08
- अमृत(शुभ)23:08 – 00:33 (21 अप्रैल)
- चर(सामान्य)00:33 (21 अप्रैल) – 01:58 (21 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:58 (21 अप्रैल) – 03:23 (21 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:23 (21 अप्रैल) – 04:48 (21 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)04:48 (21 अप्रैल) – 06:13 (21 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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