पंचांग 2 जुलाई 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 जुलाई 1985 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय19:24
चंद्रास्तनहीं
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 17:38 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 15:40 (3 जुल॰) तक
नक्षत्र
मूल 11:36 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 10:19 (3 जुल॰) तक
योग
ब्रह्म 16:55 तक, फिर इन्द्र 14:15 (3 जुल॰) तक
करण
विष्टि 06:46 तक, फिर बव 17:38 तक, फिर बालव 04:35 (3 जुल॰) तक, फिर कौलव 15:40 (3 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:04
  • राहु काल15:56 – 17:35
  • यमगंड09:20 – 10:59
  • गुलिक काल12:38 – 14:17

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:01 – 07:40
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:40 – 09:20
  • चर(सामान्य)09:20 – 10:59
  • लाभ(शुभ)10:59 – 12:38
  • अमृत(शुभ)12:38 – 14:17
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:56
  • शुभ(शुभ)15:56 – 17:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:15

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:35
  • लाभ(शुभ)20:35 – 21:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:56 – 23:17
  • शुभ(शुभ)23:17 – 00:38 (3 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)00:38 (3 जुल॰) – 01:59 (3 जुल॰)
  • चर(सामान्य)01:59 (3 जुल॰) – 03:20 (3 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:20 (3 जुल॰) – 04:41 (3 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:41 (3 जुल॰) – 06:02 (3 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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