पंचांग 16 सितंबर 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 सितंबर 1985 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:36
चंद्रोदय07:41
चंद्रास्त19:55
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कन्या 04:28 (17 सित॰) तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 18:39 तक, फिर शुक्ल तृतीया 15:31 (17 सित॰) तक
नक्षत्र
हस्त 17:39 तक, फिर चित्रा 15:18 (17 सित॰) तक
योग
शुक्ल 12:43 तक, फिर ब्रह्म 09:00 (17 सित॰) तक
करण
बालव 08:14 तक, फिर कौलव 18:39 तक, फिर तैतिल 05:05 (17 सित॰) तक, फिर गर 15:31 (17 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
  • राहु काल07:54 – 09:25
  • यमगंड10:57 – 12:29
  • गुलिक काल14:01 – 15:32

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:22 – 07:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
  • शुभ(शुभ)09:25 – 10:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:29
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:29 – 14:01
  • चर(सामान्य)14:01 – 15:32
  • लाभ(शुभ)15:32 – 17:04
  • अमृत(शुभ)17:04 – 18:36

रात

  • चर(सामान्य)18:36 – 20:04
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:04 – 21:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:32 – 23:01
  • लाभ(शुभ)23:01 – 00:29 (17 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:29 (17 सित॰) – 01:57 (17 सित॰)
  • शुभ(शुभ)01:57 (17 सित॰) – 03:25 (17 सित॰)
  • अमृत(शुभ)03:25 (17 सित॰) – 04:54 (17 सित॰)
  • चर(सामान्य)04:54 (17 सित॰) – 06:22 (17 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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