पंचांग 20 अक्टूबर 1985
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 अक्टूबर 1985 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय12:49
चंद्रास्त23:57
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
- संवत्सर:
- क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- धनु 19:04 तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल सप्तमी 14:12 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 13:23 (21 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 13:10 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 13:00 (21 अक्टू॰) तक
- योग
- सुकर्मा 18:52 तक, फिर धृति 17:11 (21 अक्टू॰) तक
- करण
- वणिज 14:12 तक, फिर विष्टि 01:42 (21 अक्टू॰) तक, फिर बव 13:23 (21 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
- राहु काल16:41 – 18:08
- यमगंड12:19 – 13:46
- गुलिक काल15:14 – 16:41
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:29 – 07:57
- चर(सामान्य)07:57 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:51
- अमृत(शुभ)10:51 – 12:19
- काल(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:46
- शुभ(शुभ)13:46 – 15:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:14 – 16:41
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:41 – 18:08
रात
- शुभ(शुभ)18:08 – 19:41
- अमृत(शुभ)19:41 – 21:14
- चर(सामान्य)21:14 – 22:46
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:46 – 00:19 (21 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:19 (21 अक्टू॰) – 01:52 (21 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)01:52 (21 अक्टू॰) – 03:24 (21 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (21 अक्टू॰) – 04:57 (21 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)04:57 (21 अक्टू॰) – 06:30 (21 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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