पंचांग 12 नवंबर 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 नवंबर 1985 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:39
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त17:46
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
तुला 01:22 (13 नव॰) तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 19:50 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 16:06 (13 नव॰) तक
नक्षत्र
स्वाती 09:37 तक, फिर विशाखा 06:37 (13 नव॰) तक, फिर अनुराधा 03:43 (14 नव॰) तक
योग
सौभाग्य 20:21 तक, फिर शोभन 16:05 (13 नव॰) तक
करण
चतुष्पद 09:43 तक, फिर नाग 19:50 तक, फिर किंस्तुघ्न 05:57 (13 नव॰) तक, फिर बव 16:06 (13 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल15:08 – 16:33
  • यमगंड09:29 – 10:53
  • गुलिक काल12:18 – 13:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:39 – 08:04
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:04 – 09:29
  • चर(सामान्य)09:29 – 10:53
  • लाभ(शुभ)10:53 – 12:18
  • अमृत(शुभ)12:18 – 13:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
  • शुभ(शुभ)15:08 – 16:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:33 – 17:57

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:33
  • लाभ(शुभ)19:33 – 21:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:08 – 22:43
  • शुभ(शुभ)22:43 – 00:18 (13 नव॰)
  • अमृत(शुभ)00:18 (13 नव॰) – 01:54 (13 नव॰)
  • चर(सामान्य)01:54 (13 नव॰) – 03:29 (13 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:29 (13 नव॰) – 05:04 (13 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:04 (13 नव॰) – 06:39 (13 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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