पंचांग 15 दिसंबर 1985
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 दिसंबर 1985 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:58
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय10:13
चंद्रास्त21:32
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
- संवत्सर:
- क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी 19:30 तक, फिर शुक्ल पंचमी 18:25 (16 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 05:02 (16 दिस॰) तक, फिर धनिष्ठा 04:55 (17 दिस॰) तक
- योग
- ध्रुव 07:02 तक, फिर व्याघात 04:33 (16 दिस॰) तक, फिर हर्षण 02:43 (17 दिस॰) तक
- करण
- वणिज 08:21 तक, फिर विष्टि 19:30 तक, फिर बव 06:51 (16 दिस॰) तक, फिर बालव 18:25 (16 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:51
- राहु काल16:37 – 18:00
- यमगंड12:29 – 13:52
- गुलिक काल15:15 – 16:37
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:58 – 08:21
- चर(सामान्य)08:21 – 09:44
- लाभ(शुभ)09:44 – 11:06
- अमृत(शुभ)11:06 – 12:29
- काल(वर्जित (परंपरा))12:29 – 13:52
- शुभ(शुभ)13:52 – 15:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:15 – 16:37
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:37 – 18:00
रात
- शुभ(शुभ)18:00 – 19:37
- अमृत(शुभ)19:37 – 21:15
- चर(सामान्य)21:15 – 22:52
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:52 – 00:29 (16 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:29 (16 दिस॰) – 02:07 (16 दिस॰)
- लाभ(शुभ)02:07 (16 दिस॰) – 03:44 (16 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:44 (16 दिस॰) – 05:21 (16 दिस॰)
- शुभ(शुभ)05:21 (16 दिस॰) – 06:59 (16 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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