पंचांग 22 दिसंबर 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 दिसंबर 1985 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय14:29
चंद्रास्त03:32 (23 दिस॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 03:42 (23 दिस॰) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 06:27 (24 दिस॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 15:24 तक, फिर भरणी 18:35 (23 दिस॰) तक
योग
शिव 03:35 (23 दिस॰) तक, फिर सिद्ध 04:35 (24 दिस॰) तक
करण
वणिज 14:19 तक, फिर विष्टि 03:42 (23 दिस॰) तक, फिर बव 17:05 (23 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 12:55
  • राहु काल16:41 – 18:03
  • यमगंड12:33 – 13:55
  • गुलिक काल15:18 – 16:41

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:02 – 08:25
  • चर(सामान्य)08:25 – 09:47
  • लाभ(शुभ)09:47 – 11:10
  • अमृत(शुभ)11:10 – 12:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:33 – 13:55
  • शुभ(शुभ)13:55 – 15:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:18 – 16:41
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:41 – 18:03

रात

  • शुभ(शुभ)18:03 – 19:41
  • अमृत(शुभ)19:41 – 21:18
  • चर(सामान्य)21:18 – 22:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:55 – 00:33 (23 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:33 (23 दिस॰) – 02:10 (23 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:10 (23 दिस॰) – 03:48 (23 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:48 (23 दिस॰) – 05:25 (23 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:25 (23 दिस॰) – 07:02 (23 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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