पंचांग 14 अप्रैल 1986

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 अप्रैल 1986 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:18
सूर्यास्त18:51
चंद्रोदय09:33
चंद्रास्त23:19
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृषभ 21:23 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 23:01 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 01:22 (16 अप्रैल) तक
नक्षत्र
रोहिणी 07:52 तक, फिर मृगशीर्ष 10:52 (15 अप्रैल) तक
योग
सौभाग्य 07:30 तक, फिर शोभन 08:27 (15 अप्रैल) तक
करण
बव 09:45 तक, फिर बालव 23:01 तक, फिर कौलव 12:14 (15 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
  • राहु काल07:53 – 09:27
  • यमगंड11:01 – 12:35
  • गुलिक काल14:09 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:18 – 07:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
  • शुभ(शुभ)09:27 – 11:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:09
  • चर(सामान्य)14:09 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:17
  • अमृत(शुभ)17:17 – 18:51

रात

  • चर(सामान्य)18:51 – 20:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:42
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:08
  • लाभ(शुभ)23:08 – 00:34 (15 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:34 (15 अप्रैल) – 02:00 (15 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)02:00 (15 अप्रैल) – 03:26 (15 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)03:26 (15 अप्रैल) – 04:52 (15 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)04:52 (15 अप्रैल) – 06:18 (15 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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