पंचांग 22 सितंबर 1986

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 सितंबर 1986 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:31
चंद्रोदय21:13
चंद्रास्त09:45
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मेष 02:06 (23 सित॰) तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 12:55 तक, फिर कृष्ण पंचमी 14:50 (23 सित॰) तक
नक्षत्र
भरणी 19:30 तक, फिर कृत्तिका 22:04 (23 सित॰) तक
योग
हर्षण 03:34 (23 सित॰) तक, फिर वज्र 04:14 (24 सित॰) तक
करण
बालव 12:55 तक, फिर कौलव 01:49 (23 सित॰) तक, फिर तैतिल 14:50 (23 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:51
  • राहु काल07:54 – 09:25
  • यमगंड10:56 – 12:27
  • गुलिक काल13:58 – 15:29

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:23 – 07:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
  • शुभ(शुभ)09:25 – 10:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:56 – 12:27
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:27 – 13:58
  • चर(सामान्य)13:58 – 15:29
  • लाभ(शुभ)15:29 – 17:00
  • अमृत(शुभ)17:00 – 18:31

रात

  • चर(सामान्य)18:31 – 20:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:00 – 21:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:29 – 22:58
  • लाभ(शुभ)22:58 – 00:27 (23 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:27 (23 सित॰) – 01:56 (23 सित॰)
  • शुभ(शुभ)01:56 (23 सित॰) – 03:25 (23 सित॰)
  • अमृत(शुभ)03:25 (23 सित॰) – 04:54 (23 सित॰)
  • चर(सामान्य)04:54 (23 सित॰) – 06:23 (23 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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