पंचांग 25 अक्टूबर 1986
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 अक्टूबर 1986 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय23:57
चंद्रास्त12:49
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
- संवत्सर:
- क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- मिथुन 10:53 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 14:53 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 16:50 (26 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 17:33 तक, फिर पुष्य 19:58 (26 अक्टू॰) तक
- योग
- सिद्ध 14:54 तक, फिर साध्य 15:21 (26 अक्टू॰) तक
- करण
- बव 14:53 तक, फिर बालव 03:55 (26 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 16:50 (26 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल09:24 – 10:51
- यमगंड13:45 – 15:12
- गुलिक काल06:31 – 07:58
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:31 – 07:58
- शुभ(शुभ)07:58 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:51
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
- चर(सामान्य)12:18 – 13:45
- लाभ(शुभ)13:45 – 15:12
- अमृत(शुभ)15:12 – 16:38
- काल(वर्जित (परंपरा))16:38 – 18:05
रात
- लाभ(शुभ)18:05 – 19:39
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:39 – 21:12
- शुभ(शुभ)21:12 – 22:45
- अमृत(शुभ)22:45 – 00:18 (26 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)00:18 (26 अक्टू॰) – 01:52 (26 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:52 (26 अक्टू॰) – 03:25 (26 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 अक्टू॰) – 04:58 (26 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)04:58 (26 अक्टू॰) – 06:31 (26 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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