पंचांग 7 नवंबर 1986

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

7 नवंबर 1986 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:36
सूर्यास्त17:59
चंद्रोदय11:54
चंद्रास्त23:04
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
धनु 12:19 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 17:33 तक, फिर शुक्ल सप्तमी 15:30 (8 नव॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 06:45 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 05:11 (8 नव॰) तक, फिर श्रवण 04:07 (9 नव॰) तक
योग
शूल 02:39 (8 नव॰) तक, फिर गण्ड 23:59 (8 नव॰) तक
करण
कौलव 06:45 तक, फिर तैतिल 17:33 तक, फिर गर 04:28 (8 नव॰) तक, फिर वणिज 15:30 (8 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40
  • राहु काल10:52 – 12:18
  • यमगंड15:08 – 16:34
  • गुलिक काल08:02 – 09:27

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:36 – 08:02
  • लाभ(शुभ)08:02 – 09:27
  • अमृत(शुभ)09:27 – 10:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:18
  • शुभ(शुभ)12:18 – 13:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:34
  • चर(सामान्य)16:34 – 17:59

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:59 – 19:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:34 – 21:08
  • लाभ(शुभ)21:08 – 22:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:18 (8 नव॰)
  • शुभ(शुभ)00:18 (8 नव॰) – 01:53 (8 नव॰)
  • अमृत(शुभ)01:53 (8 नव॰) – 03:27 (8 नव॰)
  • चर(सामान्य)03:27 (8 नव॰) – 05:02 (8 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:02 (8 नव॰) – 06:37 (8 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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