पंचांग 31 दिसंबर 1986

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 दिसंबर 1986 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय07:17
चंद्रास्त18:24
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 08:40 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 04:46 (1 जन॰) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 01:05 (2 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 02:10 (1 जन॰) तक, फिर उत्तराषाढ़ा 23:13 (1 जन॰) तक
योग
ध्रुव 21:57 तक, फिर व्याघात 17:37 (1 जन॰) तक
करण
नाग 08:40 तक, फिर किंस्तुघ्न 18:42 तक, फिर बव 04:46 (1 जन॰) तक, फिर बालव 14:53 (1 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:37 – 14:00
  • यमगंड08:29 – 09:51
  • गुलिक काल11:14 – 12:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:06 – 08:29
  • अमृत(शुभ)08:29 – 09:51
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:51 – 11:14
  • शुभ(शुभ)11:14 – 12:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:22
  • चर(सामान्य)15:22 – 16:45
  • लाभ(शुभ)16:45 – 18:08

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:08 – 19:45
  • शुभ(शुभ)19:45 – 21:23
  • अमृत(शुभ)21:23 – 23:00
  • चर(सामान्य)23:00 – 00:37 (1 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (1 जन॰) – 02:14 (1 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:14 (1 जन॰) – 03:52 (1 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:52 (1 जन॰) – 05:29 (1 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:29 (1 जन॰) – 07:06 (1 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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