पंचांग 19 जनवरी 1987

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 जनवरी 1987 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:10
सूर्यास्त18:20
चंद्रोदय22:00
चंद्रास्त09:58
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
सिंह 04:37 (20 जन॰) तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 15:23 तक, फिर कृष्ण पंचमी 16:20 (20 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 22:14 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 23:35 (20 जन॰) तक
योग
शोभन 06:23 (20 जन॰) तक, फिर अतिगण्ड 05:43 (21 जन॰) तक
करण
बालव 15:23 तक, फिर कौलव 03:55 (20 जन॰) तक, फिर तैतिल 16:20 (20 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:07
  • राहु काल08:33 – 09:57
  • यमगंड11:21 – 12:45
  • गुलिक काल14:08 – 15:32

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:10 – 08:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:57
  • शुभ(शुभ)09:57 – 11:21
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:45
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:08
  • चर(सामान्य)14:08 – 15:32
  • लाभ(शुभ)15:32 – 16:56
  • अमृत(शुभ)16:56 – 18:20

रात

  • चर(सामान्य)18:20 – 19:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:56 – 21:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:32 – 23:08
  • लाभ(शुभ)23:08 – 00:45 (20 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:45 (20 जन॰) – 02:21 (20 जन॰)
  • शुभ(शुभ)02:21 (20 जन॰) – 03:57 (20 जन॰)
  • अमृत(शुभ)03:57 (20 जन॰) – 05:33 (20 जन॰)
  • चर(सामान्य)05:33 (20 जन॰) – 07:10 (20 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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