पंचांग 20 फ़रवरी 1987

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 फ़रवरी 1987 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय00:29 (21 फ़र॰)
चंद्रास्त11:00
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
तुला 23:39 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 03:13 (21 फ़र॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 01:31 (22 फ़र॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 05:28 (21 फ़र॰) तक, फिर अनुराधा 04:24 (22 फ़र॰) तक
योग
ध्रुव 03:05 (21 फ़र॰) तक, फिर व्याघात 00:32 (22 फ़र॰) तक
करण
विष्टि 15:53 तक, फिर बव 03:13 (21 फ़र॰) तक, फिर बालव 14:25 (21 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल11:21 – 12:48
  • यमगंड15:42 – 17:09
  • गुलिक काल08:27 – 09:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:59 – 08:27
  • लाभ(शुभ)08:27 – 09:54
  • अमृत(शुभ)09:54 – 11:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:48
  • शुभ(शुभ)12:48 – 14:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:09
  • चर(सामान्य)17:09 – 18:37

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:37 – 20:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:09 – 21:42
  • लाभ(शुभ)21:42 – 23:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (21 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)00:48 (21 फ़र॰) – 02:20 (21 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)02:20 (21 फ़र॰) – 03:53 (21 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)03:53 (21 फ़र॰) – 05:26 (21 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:26 (21 फ़र॰) – 06:59 (21 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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