पंचांग 26 मार्च 1987

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 मार्च 1987 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:34
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय05:02 (27 मार्च)
चंद्रास्त15:51
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मकर 13:35 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 23:29 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 21:25 (27 मार्च) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 00:50 (27 मार्च) तक, फिर शतभिषा 23:31 (27 मार्च) तक
योग
सिद्ध 11:17 तक, फिर साध्य 08:21 (27 मार्च) तक
करण
कौलव 12:35 तक, फिर तैतिल 23:29 तक, फिर गर 10:25 (27 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:05
  • राहु काल14:12 – 15:43
  • यमगंड06:34 – 08:05
  • गुलिक काल09:37 – 11:09

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:34 – 08:05
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:05 – 09:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:37 – 11:09
  • चर(सामान्य)11:09 – 12:40
  • लाभ(शुभ)12:40 – 14:12
  • अमृत(शुभ)14:12 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
  • शुभ(शुभ)17:15 – 18:46

रात

  • अमृत(शुभ)18:46 – 20:15
  • चर(सामान्य)20:15 – 21:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:40 (27 मार्च)
  • लाभ(शुभ)00:40 (27 मार्च) – 02:08 (27 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:08 (27 मार्च) – 03:36 (27 मार्च)
  • शुभ(शुभ)03:36 (27 मार्च) – 05:05 (27 मार्च)
  • अमृत(शुभ)05:05 (27 मार्च) – 06:33 (27 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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