पंचांग 26 अक्टूबर 1987
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 अक्टूबर 1987 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय09:56
चंद्रास्त20:59
- मास:
- कार्तिक (अमांत)
- संवत:
- शक 1909 · विक्रम (चैत्रादि) 2044
- संवत्सर:
- प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 23:16 तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी 17:54 तक, फिर शुक्ल पंचमी 15:56 (27 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 23:16 तक, फिर मूल 21:59 (27 अक्टू॰) तक
- योग
- शोभन 19:24 तक, फिर अतिगण्ड 16:38 (27 अक्टू॰) तक
- करण
- वणिज 06:49 तक, फिर विष्टि 17:54 तक, फिर बव 04:56 (27 अक्टू॰) तक, फिर बालव 15:56 (27 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल07:58 – 09:25
- यमगंड10:51 – 12:18
- गुलिक काल13:45 – 15:11
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:31 – 07:58
- काल(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:25
- शुभ(शुभ)09:25 – 10:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:45
- चर(सामान्य)13:45 – 15:11
- लाभ(शुभ)15:11 – 16:38
- अमृत(शुभ)16:38 – 18:05
रात
- चर(सामान्य)18:05 – 19:38
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:38 – 21:12
- काल(वर्जित (परंपरा))21:12 – 22:45
- लाभ(शुभ)22:45 – 00:18 (27 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:18 (27 अक्टू॰) – 01:52 (27 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)01:52 (27 अक्टू॰) – 03:25 (27 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)03:25 (27 अक्टू॰) – 04:58 (27 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)04:58 (27 अक्टू॰) – 06:32 (27 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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