पंचांग 29 जून 1988

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 जून 1988 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय19:05
चंद्रास्तनहीं
मास:
ज्येष्ठ (अमांत)
संवत:
शक 1910 · विक्रम (चैत्रादि) 2045
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 01:15 (30 जून) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 22:25 (30 जून) तक
नक्षत्र
मूल 23:13 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 21:13 (30 जून) तक
योग
शुक्ल 11:00 तक, फिर ब्रह्म 07:48 (30 जून) तक
करण
विष्टि 14:33 तक, फिर बव 01:15 (30 जून) तक, फिर बालव 11:52 (30 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:37 – 14:17
  • यमगंड07:40 – 09:19
  • गुलिक काल10:58 – 12:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:01 – 07:40
  • अमृत(शुभ)07:40 – 09:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:19 – 10:58
  • शुभ(शुभ)10:58 – 12:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:56
  • चर(सामान्य)15:56 – 17:35
  • लाभ(शुभ)17:35 – 19:14

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:35
  • शुभ(शुभ)20:35 – 21:56
  • अमृत(शुभ)21:56 – 23:17
  • चर(सामान्य)23:17 – 00:38 (30 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (30 जून) – 01:58 (30 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (30 जून) – 03:19 (30 जून)
  • लाभ(शुभ)03:19 (30 जून) – 04:40 (30 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:40 (30 जून) – 06:01 (30 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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