पंचांग 4 जुलाई 1988

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 जुलाई 1988 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:02
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय23:10
चंद्रास्त10:29
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1910 · विक्रम (चैत्रादि) 2045
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कुंभ 05:28 (5 जुल॰) तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 10:38 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 08:09 (5 जुल॰) तक
नक्षत्र
शतभिषा 12:43 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 11:05 (5 जुल॰) तक
योग
आयुष्मान 14:33 तक, फिर सौभाग्य 11:32 (5 जुल॰) तक
करण
तैतिल 10:38 तक, फिर गर 21:21 तक, फिर वणिज 08:09 (5 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:05
  • राहु काल07:41 – 09:20
  • यमगंड10:59 – 12:38
  • गुलिक काल14:17 – 15:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:02 – 07:41
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:41 – 09:20
  • शुभ(शुभ)09:20 – 10:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:17
  • चर(सामान्य)14:17 – 15:57
  • लाभ(शुभ)15:57 – 17:36
  • अमृत(शुभ)17:36 – 19:15

रात

  • चर(सामान्य)19:15 – 20:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:36 – 21:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:18
  • लाभ(शुभ)23:18 – 00:39 (5 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:39 (5 जुल॰) – 02:00 (5 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)02:00 (5 जुल॰) – 03:20 (5 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)03:20 (5 जुल॰) – 04:41 (5 जुल॰)
  • चर(सामान्य)04:41 (5 जुल॰) – 06:02 (5 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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