पंचांग 26 अक्टूबर 1988
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 अक्टूबर 1988 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय18:55
चंद्रास्त07:28
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1910 · विक्रम (चैत्रादि) 2045
- संवत्सर:
- विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- मेष 21:49 तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 07:08 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 04:37 (27 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण तृतीया 02:41 (28 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- भरणी 16:16 तक, फिर कृत्तिका 14:42 (27 अक्टू॰) तक
- योग
- सिद्धि 11:48 तक, फिर व्यतीपात 08:40 (27 अक्टू॰) तक
- करण
- कौलव 07:08 तक, फिर तैतिल 17:49 तक, फिर गर 04:37 (27 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 15:34 (27 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:18 – 13:45
- यमगंड07:58 – 09:25
- गुलिक काल10:51 – 12:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:31 – 07:58
- अमृत(शुभ)07:58 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:51
- शुभ(शुभ)10:51 – 12:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:11
- चर(सामान्य)15:11 – 16:38
- लाभ(शुभ)16:38 – 18:04
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:04 – 19:38
- शुभ(शुभ)19:38 – 21:11
- अमृत(शुभ)21:11 – 22:45
- चर(सामान्य)22:45 – 00:18 (27 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:18 (27 अक्टू॰) – 01:52 (27 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (27 अक्टू॰) – 03:25 (27 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (27 अक्टू॰) – 04:58 (27 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:58 (27 अक्टू॰) – 06:32 (27 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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