पंचांग 13 दिसंबर 1988

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 दिसंबर 1988 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:57
सूर्यास्त17:59
चंद्रोदय10:34
चंद्रास्त22:07
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1910 · विक्रम (चैत्रादि) 2045
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मकर 06:37 (14 दिस॰) तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 03:58 (14 दिस॰) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 02:04 (15 दिस॰) तक
नक्षत्र
श्रवण 19:12 तक, फिर धनिष्ठा 18:01 (14 दिस॰) तक
योग
व्याघात 22:16 तक, फिर हर्षण 19:32 (14 दिस॰) तक
करण
बव 16:53 तक, फिर बालव 03:58 (14 दिस॰) तक, फिर कौलव 15:02 (14 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:50
  • राहु काल15:14 – 16:37
  • यमगंड09:43 – 11:06
  • गुलिक काल12:28 – 13:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:57 – 08:20
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:20 – 09:43
  • चर(सामान्य)09:43 – 11:06
  • लाभ(शुभ)11:06 – 12:28
  • अमृत(शुभ)12:28 – 13:51
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:51 – 15:14
  • शुभ(शुभ)15:14 – 16:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:37 – 17:59

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))17:59 – 19:37
  • लाभ(शुभ)19:37 – 21:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:14 – 22:51
  • शुभ(शुभ)22:51 – 00:29 (14 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)00:29 (14 दिस॰) – 02:06 (14 दिस॰)
  • चर(सामान्य)02:06 (14 दिस॰) – 03:43 (14 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:43 (14 दिस॰) – 05:21 (14 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:21 (14 दिस॰) – 06:58 (14 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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