पंचांग 29 मई 1989

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 मई 1989 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:06
चंद्रोदय02:00 (30 मई)
चंद्रास्त13:37
मास:
वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1911 · विक्रम (चैत्रादि) 2046
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
कुंभ 14:20 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण नवमी 18:24 तक, फिर कृष्ण दशमी 15:54 (30 मई) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 19:57 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 18:13 (30 मई) तक
योग
विष्कम्भ 12:53 तक, फिर प्रीति 09:51 (30 मई) तक
करण
तैतिल 07:32 तक, फिर गर 18:24 तक, फिर वणिज 05:11 (30 मई) तक, फिर विष्टि 15:54 (30 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:58
  • राहु काल07:36 – 09:14
  • यमगंड10:53 – 12:31
  • गुलिक काल14:10 – 15:49

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)05:57 – 07:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:36 – 09:14
  • शुभ(शुभ)09:14 – 10:53
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:10
  • चर(सामान्य)14:10 – 15:49
  • लाभ(शुभ)15:49 – 17:27
  • अमृत(शुभ)17:27 – 19:06

रात

  • चर(सामान्य)19:06 – 20:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:27 – 21:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:49 – 23:10
  • लाभ(शुभ)23:10 – 00:31 (30 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:31 (30 मई) – 01:53 (30 मई)
  • शुभ(शुभ)01:53 (30 मई) – 03:14 (30 मई)
  • अमृत(शुभ)03:14 (30 मई) – 04:36 (30 मई)
  • चर(सामान्य)04:36 (30 मई) – 05:57 (30 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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