पंचांग 11 सितंबर 1989

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 सितंबर 1989 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय15:35
चंद्रास्त02:53 (12 सित॰)
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1911 · विक्रम (चैत्रादि) 2046
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
धनु 14:22 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 03:31 (12 सित॰) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 01:51 (13 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 08:23 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 08:02 (12 सित॰) तक
योग
सौभाग्य 11:46 तक, फिर शोभन 09:46 (12 सित॰) तक
करण
वणिज 16:04 तक, फिर विष्टि 03:31 (12 सित॰) तक, फिर बव 14:47 (12 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:55
  • राहु काल07:53 – 09:26
  • यमगंड10:58 – 12:31
  • गुलिक काल14:03 – 15:35

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:21 – 07:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
  • शुभ(शुभ)09:26 – 10:58
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:03
  • चर(सामान्य)14:03 – 15:35
  • लाभ(शुभ)15:35 – 17:08
  • अमृत(शुभ)17:08 – 18:40

रात

  • चर(सामान्य)18:40 – 20:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:08 – 21:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:35 – 23:03
  • लाभ(शुभ)23:03 – 00:31 (12 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:31 (12 सित॰) – 01:58 (12 सित॰)
  • शुभ(शुभ)01:58 (12 सित॰) – 03:26 (12 सित॰)
  • अमृत(शुभ)03:26 (12 सित॰) – 04:54 (12 सित॰)
  • चर(सामान्य)04:54 (12 सित॰) – 06:21 (12 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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