पंचांग 12 सितंबर 1990

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 सितंबर 1990 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय00:39 (13 सित॰)
चंद्रास्त13:27
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1912 · विक्रम (चैत्रादि) 2047
संवत्सर:
प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ 10:40 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 13:21 तक, फिर कृष्ण नवमी 11:27 (13 सित॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 22:03 तक, फिर आर्द्रा 21:00 (13 सित॰) तक
योग
सिद्धि 23:15 तक, फिर व्यतीपात 20:42 (13 सित॰) तक
करण
कौलव 13:21 तक, फिर तैतिल 00:22 (13 सित॰) तक, फिर गर 11:27 (13 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:55परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:30 – 14:03
  • यमगंड07:54 – 09:26
  • गुलिक काल10:58 – 12:30

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:21 – 07:54
  • अमृत(शुभ)07:54 – 09:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:58
  • शुभ(शुभ)10:58 – 12:30
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:30 – 14:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:03 – 15:35
  • चर(सामान्य)15:35 – 17:07
  • लाभ(शुभ)17:07 – 18:39

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:39 – 20:07
  • शुभ(शुभ)20:07 – 21:35
  • अमृत(शुभ)21:35 – 23:03
  • चर(सामान्य)23:03 – 00:30 (13 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:30 (13 सित॰) – 01:58 (13 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (13 सित॰) – 03:26 (13 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:26 (13 सित॰) – 04:54 (13 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (13 सित॰) – 06:21 (13 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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