पंचांग 10 अप्रैल 1991

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अप्रैल 1991 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय03:41 (11 अप्रैल)
चंद्रास्त14:51
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1913 · विक्रम (चैत्रादि) 2048
संवत्सर:
प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मकर 12:55 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 05:42 (11 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 05:37 (12 अप्रैल) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 01:33 (11 अप्रैल) तक, फिर शतभिषा 02:14 (12 अप्रैल) तक
योग
साध्य 07:50 तक, फिर शुभ 07:17 (11 अप्रैल) तक
करण
बव 17:26 तक, फिर बालव 05:42 (11 अप्रैल) तक, फिर कौलव 17:45 (11 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:36 – 14:09
  • यमगंड07:55 – 09:29
  • गुलिक काल11:02 – 12:36

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:22 – 07:55
  • अमृत(शुभ)07:55 – 09:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:29 – 11:02
  • शुभ(शुभ)11:02 – 12:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:16
  • लाभ(शुभ)17:16 – 18:50

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
  • शुभ(शुभ)20:16 – 21:42
  • अमृत(शुभ)21:42 – 23:09
  • चर(सामान्य)23:09 – 00:35 (11 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:35 (11 अप्रैल) – 02:02 (11 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:02 (11 अप्रैल) – 03:28 (11 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)03:28 (11 अप्रैल) – 04:55 (11 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:55 (11 अप्रैल) – 06:21 (11 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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