पंचांग 10 अगस्त 1991

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अगस्त 1991 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:14
सूर्यास्त19:05
चंद्रोदय06:15
चंद्रास्त19:15
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1913 · विक्रम (चैत्रादि) 2048
संवत्सर:
प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
कर्क 18:53 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 07:57 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 04:47 (11 अग॰) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 01:59 (12 अग॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 18:53 तक, फिर मघा 16:42 (11 अग॰) तक
योग
व्यतीपात 08:13 तक, फिर वरीयान 04:32 (11 अग॰) तक, फिर परिघ 01:10 (12 अग॰) तक
करण
नाग 07:57 तक, फिर किंस्तुघ्न 18:20 तक, फिर बव 04:47 (11 अग॰) तक, फिर बालव 15:20 (11 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:05
  • राहु काल09:27 – 11:03
  • यमगंड14:16 – 15:52
  • गुलिक काल06:14 – 07:50

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:14 – 07:50
  • शुभ(शुभ)07:50 – 09:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:39
  • चर(सामान्य)12:39 – 14:16
  • लाभ(शुभ)14:16 – 15:52
  • अमृत(शुभ)15:52 – 17:28
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:28 – 19:05

रात

  • लाभ(शुभ)19:05 – 20:28
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:28 – 21:52
  • शुभ(शुभ)21:52 – 23:16
  • अमृत(शुभ)23:16 – 00:40 (11 अग॰)
  • चर(सामान्य)00:40 (11 अग॰) – 02:03 (11 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:03 (11 अग॰) – 03:27 (11 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (11 अग॰) – 04:51 (11 अग॰)
  • लाभ(शुभ)04:51 (11 अग॰) – 06:14 (11 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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