पंचांग 30 अक्टूबर 1991
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 अक्टूबर 1991 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय00:41 (31 अक्टू॰)
चंद्रास्त12:57
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1913 · विक्रम (चैत्रादि) 2048
- संवत्सर:
- प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 23:43 तक, फिर कृष्ण नवमी 21:55 (31 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पुष्य 19:36 तक, फिर आश्लेषा 18:29 (31 अक्टू॰) तक
- योग
- साध्य 09:39 तक, फिर शुभ 06:56 (31 अक्टू॰) तक
- करण
- बालव 12:40 तक, फिर कौलव 23:43 तक, फिर तैतिल 10:48 (31 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:18 – 13:44
- यमगंड07:59 – 09:25
- गुलिक काल10:51 – 12:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:33 – 07:59
- अमृत(शुभ)07:59 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:51
- शुभ(शुभ)10:51 – 12:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:10
- चर(सामान्य)15:10 – 16:36
- लाभ(शुभ)16:36 – 18:03
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:03 – 19:36
- शुभ(शुभ)19:36 – 21:10
- अमृत(शुभ)21:10 – 22:44
- चर(सामान्य)22:44 – 00:18 (31 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:18 (31 अक्टू॰) – 01:52 (31 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (31 अक्टू॰) – 03:25 (31 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (31 अक्टू॰) – 04:59 (31 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:59 (31 अक्टू॰) – 06:33 (31 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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