पंचांग 10 अप्रैल 1992
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 अप्रैल 1992 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय12:11
चंद्रास्त01:36 (11 अप्रैल)
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1914 · विक्रम (चैत्रादि) 2049
- संवत्सर:
- अंगिरा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मिथुन 20:39 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल अष्टमी 02:34 (11 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल नवमी 00:22 (12 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 02:19 (11 अप्रैल) तक, फिर पुष्य 00:52 (12 अप्रैल) तक
- योग
- अतिगण्ड 09:05 तक, फिर सुकर्मा 06:19 (11 अप्रैल) तक, फिर धृति 03:23 (12 अप्रैल) तक
- करण
- विष्टि 15:36 तक, फिर बव 02:34 (11 अप्रैल) तक, फिर बालव 13:30 (11 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:00
- राहु काल11:02 – 12:35
- यमगंड15:43 – 17:16
- गुलिक काल07:55 – 09:28
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:21 – 07:55
- लाभ(शुभ)07:55 – 09:28
- अमृत(शुभ)09:28 – 11:02
- काल(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:35
- शुभ(शुभ)12:35 – 14:09
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:16
- चर(सामान्य)17:16 – 18:50
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
- काल(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:42
- लाभ(शुभ)21:42 – 23:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:09 – 00:35 (11 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)00:35 (11 अप्रैल) – 02:01 (11 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)02:01 (11 अप्रैल) – 03:28 (11 अप्रैल)
- चर(सामान्य)03:28 (11 अप्रैल) – 04:54 (11 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (11 अप्रैल) – 06:20 (11 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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