पंचांग 16 अप्रैल 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 अप्रैल 1994 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:51
चंद्रोदय09:56
चंद्रास्त23:20
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृषभ 12:56 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 17:53 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 19:17 (17 अप्रैल) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 02:03 (17 अप्रैल) तक, फिर आर्द्रा 03:50 (18 अप्रैल) तक
योग
शोभन 20:54 तक, फिर अतिगण्ड 20:55 (17 अप्रैल) तक
करण
बालव 17:53 तक, फिर कौलव 06:39 (17 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
  • राहु काल09:26 – 11:00
  • यमगंड14:08 – 15:43
  • गुलिक काल06:17 – 07:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:51
  • शुभ(शुभ)07:51 – 09:26
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 11:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:34
  • चर(सामान्य)12:34 – 14:08
  • लाभ(शुभ)14:08 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:17
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:17 – 18:51

रात

  • लाभ(शुभ)18:51 – 20:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:42
  • शुभ(शुभ)21:42 – 23:08
  • अमृत(शुभ)23:08 – 00:34 (17 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)00:34 (17 अप्रैल) – 01:59 (17 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:59 (17 अप्रैल) – 03:25 (17 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:25 (17 अप्रैल) – 04:51 (17 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)04:51 (17 अप्रैल) – 06:16 (17 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें