पंचांग 16 जून 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 जून 1994 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय12:04
चंद्रास्त00:25 (17 जून)
मास:
ज्येष्ठ (अमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
सिंह 22:35 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 14:16 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 12:30 (17 जून) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 16:48 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 15:46 (17 जून) तक
योग
सिद्धि 01:30 (17 जून) तक, फिर व्यतीपात 22:51 (17 जून) तक
करण
वणिज 14:16 तक, फिर विष्टि 01:26 (17 जून) तक, फिर बव 12:30 (17 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01
  • राहु काल14:14 – 15:53
  • यमगंड05:57 – 07:37
  • गुलिक काल09:16 – 10:55

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)05:57 – 07:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:37 – 09:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:16 – 10:55
  • चर(सामान्य)10:55 – 12:35
  • लाभ(शुभ)12:35 – 14:14
  • अमृत(शुभ)14:14 – 15:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:53 – 17:32
  • शुभ(शुभ)17:32 – 19:12

रात

  • अमृत(शुभ)19:12 – 20:33
  • चर(सामान्य)20:33 – 21:53
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:53 – 23:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:35 (17 जून)
  • लाभ(शुभ)00:35 (17 जून) – 01:55 (17 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:55 (17 जून) – 03:16 (17 जून)
  • शुभ(शुभ)03:16 (17 जून) – 04:37 (17 जून)
  • अमृत(शुभ)04:37 (17 जून) – 05:58 (17 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5

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