पंचांग 25 अक्टूबर 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 अक्टूबर 1994 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय22:33
चंद्रास्त11:03
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 06:32 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 08:28 (26 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 07:09 (26 अक्टू॰) तक
योग
शिव 03:35 (26 अक्टू॰) तक, फिर सिद्ध 03:39 (27 अक्टू॰) तक
करण
तैतिल 06:32 तक, फिर गर 19:34 तक, फिर वणिज 08:28 (26 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल15:12 – 16:38
  • यमगंड09:24 – 10:51
  • गुलिक काल12:18 – 13:45

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:31 – 07:58
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:51
  • लाभ(शुभ)10:51 – 12:18
  • अमृत(शुभ)12:18 – 13:45
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:12
  • शुभ(शुभ)15:12 – 16:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:38 – 18:05

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:05 – 19:39
  • लाभ(शुभ)19:39 – 21:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:12 – 22:45
  • शुभ(शुभ)22:45 – 00:18 (26 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:18 (26 अक्टू॰) – 01:52 (26 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:52 (26 अक्टू॰) – 03:25 (26 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 अक्टू॰) – 04:58 (26 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:58 (26 अक्टू॰) – 06:31 (26 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5

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