पंचांग 5 दिसंबर 1994
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
5 दिसंबर 1994 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:52
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय09:00
चंद्रास्त20:36
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
- संवत्सर:
- भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- धनु 02:57 (6 दिस॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 19:21 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 16:56 (6 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 21:25 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 19:46 (6 दिस॰) तक
- योग
- गण्ड 17:03 तक, फिर वृद्धि 13:48 (6 दिस॰) तक
- करण
- तैतिल 08:47 तक, फिर गर 19:21 तक, फिर वणिज 06:03 (6 दिस॰) तक, फिर विष्टि 16:56 (6 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:47
- राहु काल08:15 – 09:38
- यमगंड11:01 – 12:24
- गुलिक काल13:48 – 15:11
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:52 – 08:15
- काल(वर्जित (परंपरा))08:15 – 09:38
- शुभ(शुभ)09:38 – 11:01
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:48
- चर(सामान्य)13:48 – 15:11
- लाभ(शुभ)15:11 – 16:34
- अमृत(शुभ)16:34 – 17:57
रात
- चर(सामान्य)17:57 – 19:34
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:34 – 21:11
- काल(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:48
- लाभ(शुभ)22:48 – 00:25 (6 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:25 (6 दिस॰) – 02:02 (6 दिस॰)
- शुभ(शुभ)02:02 (6 दिस॰) – 03:39 (6 दिस॰)
- अमृत(शुभ)03:39 (6 दिस॰) – 05:16 (6 दिस॰)
- चर(सामान्य)05:16 (6 दिस॰) – 06:53 (6 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5
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