पंचांग 16 फ़रवरी 1995

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 फ़रवरी 1995 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय19:28
चंद्रास्त07:15
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 17:04 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 16:00 (17 फ़र॰) तक
नक्षत्र
मघा 13:08 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 12:46 (17 फ़र॰) तक
योग
अतिगण्ड 18:36 तक, फिर सुकर्मा 16:33 (17 फ़र॰) तक
करण
कौलव 17:04 तक, फिर तैतिल 04:34 (17 फ़र॰) तक, फिर गर 16:00 (17 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल14:15 – 15:42
  • यमगंड07:02 – 08:28
  • गुलिक काल09:55 – 11:22

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)07:02 – 08:28
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:28 – 09:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:22
  • चर(सामान्य)11:22 – 12:48
  • लाभ(शुभ)12:48 – 14:15
  • अमृत(शुभ)14:15 – 15:42
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:08
  • शुभ(शुभ)17:08 – 18:35

रात

  • अमृत(शुभ)18:35 – 20:08
  • चर(सामान्य)20:08 – 21:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:41 – 23:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (17 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)00:48 (17 फ़र॰) – 02:21 (17 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:21 (17 फ़र॰) – 03:55 (17 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)03:55 (17 फ़र॰) – 05:28 (17 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)05:28 (17 फ़र॰) – 07:01 (17 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5

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