पंचांग 24 जून 1997

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

24 जून 1997 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय22:26
चंद्रास्त09:24
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1919 · विक्रम (चैत्रादि) 2054
संवत्सर:
ईश्वर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मकर 19:21 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 14:29 तक, फिर कृष्ण पंचमी 11:53 (25 जून) तक
नक्षत्र
श्रवण 08:17 तक, फिर धनिष्ठा 06:27 (25 जून) तक
योग
विष्कम्भ 01:43 (25 जून) तक, फिर प्रीति 22:36 (25 जून) तक
करण
बालव 14:29 तक, फिर कौलव 01:10 (25 जून) तक, फिर तैतिल 11:53 (25 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:03
  • राहु काल15:55 – 17:34
  • यमगंड09:18 – 10:57
  • गुलिक काल12:36 – 14:16

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:59 – 07:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:38 – 09:18
  • चर(सामान्य)09:18 – 10:57
  • लाभ(शुभ)10:57 – 12:36
  • अमृत(शुभ)12:36 – 14:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:55
  • शुभ(शुभ)15:55 – 17:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:14

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:34
  • लाभ(शुभ)20:34 – 21:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:55 – 23:16
  • शुभ(शुभ)23:16 – 00:37 (25 जून)
  • अमृत(शुभ)00:37 (25 जून) – 01:57 (25 जून)
  • चर(सामान्य)01:57 (25 जून) – 03:18 (25 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:18 (25 जून) – 04:39 (25 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:39 (25 जून) – 05:59 (25 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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