पंचांग 3 जुलाई 1997

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 जुलाई 1997 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:02
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय05:33 (4 जुल॰)
चंद्रास्त17:59
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1919 · विक्रम (चैत्रादि) 2054
संवत्सर:
ईश्वर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृषभ 12:33 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 23:44 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 00:09 (5 जुल॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 00:57 (4 जुल॰) तक, फिर आर्द्रा 02:05 (5 जुल॰) तक
योग
वृद्धि 04:19 (4 जुल॰) तक, फिर ध्रुव 03:45 (5 जुल॰) तक
करण
विष्टि 11:42 तक, फिर शकुनि 23:44 तक, फिर चतुष्पद 11:53 (4 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:05
  • राहु काल14:17 – 15:56
  • यमगंड06:02 – 07:41
  • गुलिक काल09:20 – 10:59

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:02 – 07:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:41 – 09:20
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:20 – 10:59
  • चर(सामान्य)10:59 – 12:38
  • लाभ(शुभ)12:38 – 14:17
  • अमृत(शुभ)14:17 – 15:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:56 – 17:36
  • शुभ(शुभ)17:36 – 19:15

रात

  • अमृत(शुभ)19:15 – 20:36
  • चर(सामान्य)20:36 – 21:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:17
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:17 – 00:38 (4 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)00:38 (4 जुल॰) – 01:59 (4 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:59 (4 जुल॰) – 03:20 (4 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)03:20 (4 जुल॰) – 04:41 (4 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)04:41 (4 जुल॰) – 06:02 (4 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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