पंचांग 26 अगस्त 1997

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 अगस्त 1997 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:18
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदय01:26 (27 अग॰)
चंद्रास्त13:51
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1919 · विक्रम (चैत्रादि) 2054
संवत्सर:
ईश्वर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ 00:02 (27 अग॰) तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 19:26 तक, फिर कृष्ण दशमी 19:56 (27 अग॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:38 तक, फिर मृगशीर्ष 12:36 (27 अग॰) तक
योग
हर्षण 18:44 तक, फिर वज्र 18:05 (27 अग॰) तक
करण
तैतिल 07:25 तक, फिर गर 19:26 तक, फिर वणिज 07:36 (27 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01
  • राहु काल15:45 – 17:19
  • यमगंड09:27 – 11:01
  • गुलिक काल12:36 – 14:10

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:18 – 07:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:01
  • लाभ(शुभ)11:01 – 12:36
  • अमृत(शुभ)12:36 – 14:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:45
  • शुभ(शुभ)15:45 – 17:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:19 – 18:53

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:53 – 20:19
  • लाभ(शुभ)20:19 – 21:45
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:45 – 23:10
  • शुभ(शुभ)23:10 – 00:36 (27 अग॰)
  • अमृत(शुभ)00:36 (27 अग॰) – 02:01 (27 अग॰)
  • चर(सामान्य)02:01 (27 अग॰) – 03:27 (27 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (27 अग॰) – 04:53 (27 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:53 (27 अग॰) – 06:18 (27 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें