पंचांग 15 जून 1999

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 जून 1999 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:11
चंद्रोदय07:24
चंद्रास्त20:52
मास:
ज्येष्ठ (अमांत)
संवत:
शक 1921 · विक्रम (चैत्रादि) 2056
संवत्सर:
प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
मिथुन 03:22 (16 जून) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 17:42 तक, फिर शुक्ल तृतीया 14:59 (16 जून) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 10:59 तक, फिर पुनर्वसु 08:54 (16 जून) तक
योग
वृद्धि 21:26 तक, फिर ध्रुव 18:14 (16 जून) तक
करण
बालव 07:16 तक, फिर कौलव 17:42 तक, फिर तैतिल 04:16 (16 जून) तक, फिर गर 14:59 (16 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01
  • राहु काल15:53 – 17:32
  • यमगंड09:16 – 10:55
  • गुलिक काल12:34 – 14:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:57 – 07:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:37 – 09:16
  • चर(सामान्य)09:16 – 10:55
  • लाभ(शुभ)10:55 – 12:34
  • अमृत(शुभ)12:34 – 14:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:53
  • शुभ(शुभ)15:53 – 17:32
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:32 – 19:11

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:11 – 20:32
  • लाभ(शुभ)20:32 – 21:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:53 – 23:14
  • शुभ(शुभ)23:14 – 00:34 (16 जून)
  • अमृत(शुभ)00:34 (16 जून) – 01:55 (16 जून)
  • चर(सामान्य)01:55 (16 जून) – 03:16 (16 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:16 (16 जून) – 04:37 (16 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:37 (16 जून) – 05:57 (16 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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